जौनपुर। जनपद में एक युवती द्वारा एसपी कार्यालय के बाहर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने के मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल से इलाज के बाद वापस लौटी युवती ने एक मीडिया इंटरव्यू में आरोप लगाया कि उसके साथ कथित तौर पर जबरदस्ती की गई, चोट पहुंचाई गई और न्याय के लिए उसे बदलापुर व कुटहन थानों के चक्कर लगाने पड़े।
युवती ने आरोप लगाया कि वह आशीष नाम के युवक से बातचीत करती थी और उसके कहने पर उसके साथ गई थी। युवती के मुताबिक, बाद में उसे एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया, जहां अशोक यादव नामक व्यक्ति ने उसके साथ जबरदस्ती की। युवती ने दावा किया कि घटना के दौरान उसने काफी शोर मचाया, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया। उसने शरीर पर चोट और नाखून के निशान होने की बात भी कही।
युवती का आरोप है कि घटना के बाद उसे पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद उसने कुटहन थाने में शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन उसे बदलापुर थाने भेज दिया गया। युवती के अनुसार, बदलापुर थाने से उसे घटना स्थल के आधार पर दोबारा कुटहन जाने को कहा गया।
युवती ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में कार्रवाई के बजाय उस पर समझौता करने का दबाव बनाया गया। उसके मुताबिक, एक समय आशीष के बालिग होने पर शादी कराने को लेकर समझौते जैसा दस्तावेज भी तैयार कराया गया था।
बाद में युवती ने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया। उसका कहना है कि इसी पूरे घटनाक्रम से वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई थी और न्याय नहीं मिलने से निराश होकर 13 अगस्त को एसपी कार्यालय के बाहर जहरीला पदार्थ खा लिया। वहां मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां से बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया।
युवती का आरोप है कि उसने एसपी कार्यालय में मुख्य आरोपी अशोक यादव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन पुलिस की ओर से बार-बार आशीष के मामले पर ही बात की गई। युवती का दावा है कि अशोक यादव को कुछ समय के लिए थाने पर बैठाया गया था, लेकिन करीब एक घंटे बाद उसे छोड़ दिया गया।
युवती ने अस्पताल में मेडिकल जांच को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उसने दावा किया कि उसे मेडिकल कराने से रोकने की कोशिश की गई और भविष्य को लेकर डराया गया।
मामले में युवती ने कहा कि उसे किसी प्रकार का आर्थिक मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सजा चाहिए। उसने कहा कि यदि उसके साथ गलत हुआ है तो वह नहीं चाहती कि भविष्य में किसी और लड़की के साथ ऐसी घटना हो।
हालांकि, युवती द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से मामले में आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई है और आरोपों की जांच की स्थिति क्या है, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।

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