जश्ने आज़ादी की शाम: देशभक्ति के जज़्बे से सराबोर हुई काव्य गोष्ठी
जौनपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को तंदूरी दरबार बैंक्वेट हॉल, उर्दू बाज़ार में “जश्ने आज़ादी की शाम” काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शायरों एवं कवियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत अपनी कविताओं और रचनाओं की शानदार प्रस्तुति देकर ऐसा समां बांधा कि पूरा माहौल वतन की मोहब्बत और आज़ादी के जज़्बे से सराबोर हो गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं संगठन सृजन के राष्ट्रीय प्रभारी श्री सी.पी. मित्तल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में केंद्र एवं प्रदेश की मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर राजनीति करने के बजाय देश के विकास और आम जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
कार्यक्रम में कांग्रेस कमेटी जौनपुर के शहर अध्यक्ष श्री आरिफ़ खान ने कहा कि धर्म विशेष के खिलाफ होने वाले कथित अन्याय को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी मुकदमों के जरिए कई निर्दोष लोग वर्षों से जेल में बंद हैं और ऐसे मामलों में न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि शाही ईदगाह कमेटी जौनपुर के सेक्रेटरी श्री शुएब खान (अच्छू) रहे।
काव्य गोष्ठी में शाहनवाज़ मंज़ूर, इरफ़ान जौनपुरी, क़ारी ज़्यादा, हनीफ़ जौनपुरी, ख़लील इब्ने असर, अनीस अहमद, सत्यवीर सिंह, शाहनवाज़ अहमद, पंकज सोनकर, प्रमोद वाचस्पति, तल्ख़ मेहनाज़पुरी, राजा, अज़ीम जौनपुरी, इफ्तेख़ारुल, हफ़ीज़ जौनपुरी, मौलाना ताज, साजिद अनवार, ताहिर, मोनिस जौनपुरी सहित अनेक शायरों एवं कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
शायरों की प्रस्तुतियों में देशप्रेम, भाईचारे, अमन और हिंदुस्तान की खूबसूरती का संदेश प्रमुखता से दिखाई दिया। श्रोताओं ने तालियों के साथ कवियों और शायरों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के कन्वीनर एवं संचालन की जिम्मेदारी अहमद अज़ीज़ ने संभाली। उनकी प्रभावी संचालन शैली और शायरों की शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
जश्ने आज़ादी की शाम” ने यह संदेश दिया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, आपसी भाईचारे और साझा संस्कृति में है। देशभक्ति केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं, बल्कि देश की एकता, अमन और इंसानियत की रक्षा करने का नाम भी है।
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