जौनपुर। रामपुर थाना क्षेत्र में दर्ज एक नाबालिग के अपहरण संबंधी मामले में मेडिकल परीक्षण न होने को लेकर विवाद गहरा गया है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी जौनपुर को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनकी पुत्री का मेडिकल परीक्षण कराने के बजाय उसे इसके लिए हतोत्साहित किया गया और पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
जानकारी के अनुसार, थाना रामपुर में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 एवं 137(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी उनकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग को आरोपी के घर से बरामद कर लिया।
परिजनों का कहना है कि बरामदगी के बाद पुलिस अभिरक्षा में नाबालिग को चिकित्सीय परीक्षण के लिए जिला अस्पताल जौनपुर ले जाया गया, लेकिन वहां उसका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। परिवार ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों द्वारा ऐसा वातावरण बनाया गया जिससे नाबालिग मेडिकल परीक्षण कराने से पीछे हट जाए।
शिकायत में कहा गया है कि नाबालिग को बताया गया कि मेडिकल के दौरान पुरुष डॉक्टर जांच करेंगे, कपड़े उतरवाए जाएंगे और उसे असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। परिजनों का आरोप है कि इन बातों से बच्ची को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया और बाद में उससे एक कागज पर हस्ताक्षर करा लिए गए कि वह मेडिकल परीक्षण नहीं कराना चाहती।
पीड़ित पक्ष का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में अस्पताल परिसर के भीतर परिजनों और चिकित्सक के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है। परिवार का कहना है कि वीडियो में नाबालिग स्वयं मेडिकल परीक्षण कराने की इच्छा जाहिर कर रही है, लेकिन इसके बावजूद उसका परीक्षण नहीं कराया गया।
परिजनों ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि नाबालिग के मेडिकल परीक्षण को टालने और उसे प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित कर तत्काल मेडिकल परीक्षण सुनिश्चित कराने की मांग की है।
मामले को लेकर अब पुलिस की कार्रवाई और जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली दोनों सवालों के घेरे में हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
नोट: यह समाचार पीड़ित परिवार द्वारा जिलाधिकारी जौनपुर को दिए गए शिकायती पत्र और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित चिकित्सकीय अधिकारियों, पुलिस प्रशासन एवं अन्य पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

Post a Comment