लखनऊ। विशाल सिटी, दुबग्गा स्थित नदीम रज़ा के आवास पर 7 सफ़र को शहीदान-ए-कर्बला व असीरान-ए-करबला की याद में आयोजित मजलिस-ए-अज़ा-ए-हुसैन (अ.स.) अकीदत और एहतराम के माहौल में सम्पन्न हुई। मजलिस में लखनऊ सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत कर इमाम हुसैन (अ.स.) और शहीदान-ए-करबला को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।
कार्यक्रम का संचालन मोनिस रज़ा अरज़ानीपुर ने किया। मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना अंबर अब्बास ख़ान साहब क़िबला (जौनपुर-रन्नो) ने कहा कि करबला का पैग़ाम हर दौर के इंसान के लिए नमूने अमल है। इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने अमल से यह साबित कर दिया कि हक़, इंसाफ़ और इंसानियत की हिफ़ाज़त के लिए हर क़ुर्बानी छोटी है। हमें अपने किरदार, अख़लाक़ और समाज की भलाई के लिए अहलेबैत (अ.स.) की तालीमात पर अमल करना चाहिए।
मजलिस में जनाब शनावर महमूदाबादी एवं जनाब क़ासिम रिज़वी "अना" साहब ने पेशख़्वानी की, जबकि जनाब नयाब साहब और जनाब शकील साहब ने दर्दभरे सोज़ पेश कर उपस्थित अज़ादारों की आँखें नम कर दीं। इसके बाद अली रज़ा सल्लामहु तथा मोहम्मद जवाद क़ुम्मी ने पुरसोज़ नौहे पेश किए, जिन पर अज़ादारों ने ग़म-ए-हुसैन में सीना ज़नी कर इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफ़ादार साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मजलिस के समापन पर अंजुमन-ए-मुहाफ़िजुल ईमान (दुबग्गा, लखनऊ) तथा अंजुमन-ए-पंजतनी (गौरी ख़ालसा) ने पुरअसर मातम (सीना ज़नी) किया। अंत में मुल्क की अमन-ओ-अमान, कौमी एकता तथा इंसानियत की सलामती के लिए विशेष दुआ कराई गई।
आयोजक नदीम रज़ा एवं अली रज़ा ने मजलिस में शामिल सभी उलमा, ज़ाकिरीन, शायरों, नौहाख़्वानों, अंजुमनों और अज़ादारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) का पैग़ाम पूरी इंसानियत के लिए मोहब्बत, सब्र, त्याग और न्याय का संदेश है ।
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